नैमिषारण्य भागवत कथा यात्रा

हिंदी में पूर्ण विवरण

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॥ मात श्री नर्मदे हर ॥
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
॥ श्री राधाकृष्णाय नमः ॥

तीर्थराज नैमिषारण्य में श्रीमद् भागवत कथा
एवं काशी–प्रयाग–अयोध्या यात्रा
कथा व्यास – पं. अनय रेवाशीष

अवधि – 11 दिवस

प्रारंभ – वाराणसी
समापन – लखनऊ (उ.प्र.)

दि. 25-10-2026 से 4-11-2026

यात्रा सहभाग राशि – ₹40,000/-
(भोजन, निवास, प्रवास, स्थानीय भ्रमण आदि समस्त शुल्क सम्मिलित।)

पता : ग्राम–कटकूड़ा, तह. बड़वाह, जि. खरगोन (म.प्र.)

अनय रेवाशीष – 09826764226
आशीष देशमुख – 07772832131
अंकित देशमुख – 09977488514

Email: parikrama2122@gmail.com

Website: www.narmadaparikramayatra.com

ऊर्जा स्थान – पू. गुरुजी पं. श्री अविनाशजी महाराज


कथा यात्रा विशेषता

संगीतमय आध्यात्मिक नर्मदा परिक्रमा की अपार सफलता के पश्चात कैवल्यधाम आश्रम द्वारा पावन तपोभूमि नैमिषारण्य में श्रीमद् भागवत कथा एवं दिव्य तीर्थ काशी, प्रयागराज, अयोध्या की यात्रा का अनूठा आयोजन किया जा रहा है।

काशी, प्रयागराज, अयोध्या जैसे महातीर्थों के दर्शन, साथ ही नैमिषारण्य तीर्थ में “श्रीमद् भागवत कथा” श्रवण का अत्यधिक महत्व है। प्रसिद्ध पुराणाचार्य पं. अनन्त रेवाशिष जी, जो कि "नर्मदा पुराण" के भी प्रख्यात प्रवक्ता हैं, के मुखारविन्द से "श्रीमद् भागवत महापुराण" श्रवण करना एक विलक्षण अनुभूति है। साथ में उत्तम संगीत संयोजन इसे और रसपूर्ण बनाता है।

नैमिषारण्य तीर्थ में ही वेदमहर्षि व्यास जी ने पुराणों की रचना की थी। उन्हीं वेदव्यास जी की प्रमुख गादी के निकट ही पुराणों का श्रवण जीवन को धन्य बनाता है। नैमिषारण्य वह स्थान है, जहाँ पुराण प्रवक्ता लोमहर्षक सूत जी ने शौनकादि 88 हजार ऋषि मुनियों को सभी पुराणों की कथा सुनाई थी। ऐसे स्थान पर श्री भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तित करने वाला दिव्य अनुष्ठान है।

श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से मन में सकारात्मकता, उत्साह, करुणा, सेवा के भाव जागृत होते हैं। तो आइये, योग योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र की दिव्य कथा उसी स्थान पर श्रवण करने का लाभ उठाएं, जहाँ यह सर्वप्रथम कही गई।

 


कथा यात्रा के दर्शनीय तीर्थस्थल
वाराणसी – गंगा आरती (दशाश्वमेध घाट), नाव द्वारा लगभग 15 घाटों के दर्शन, काशी विश्वनाथ दर्शन, अन्नपूर्णा मंदिर, काल भैरव, संकट मोचन मंदिर, दुर्गा मंदिर, कोड़ी माता, तुलसी मानस मंदिर, बिर्ला मंदिर (बी. एच. यू.), भारत माता मंदिर, बनारसी साड़ी खरीदारी।

प्रयाग राज – त्रिवेणी संगम स्नान, बड़े हनुमान, अक्षय वट, पातालेश्वर मंदिर।

अयोध्या – राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमान गढ़ी, सरयू घाट, कनक भवन, दशरथ महल, सीता की रसोई।

नैमिषारण्य दर्शन – चक्रतीर्थ, गोमती घाट, मनुशतरूपा तपोभूमि, व्यास गादी, सूत गादी, ललितादेवी मंदिर, भूतेश्वर, हनुमान गढ़ी, तिरुपति बालाजी मंदिर, पुराण मंदिर, नारदानंद आश्रम, आपानारायण स्वामी आश्रम, बाबा विश्वनाथ मंदिर (छोटी काशी), मृत्युंजय सिद्धपीठ, कालीपीठ आश्रम आदि प्रमुख स्थान।

3 दिवसीय 84 कोस यात्रा के अंतर्गत दर्शनीय तीर्थस्थल–
द्रारकाधीश मंदिर, दधीचि कुंड, वराह कूप, कुमनेश्वर, कुकरी तीर्थ, कोटि तीर्थ, सूर्य कुंड, कोटेश्वर महादेव, कैलाश महादेव, प्रभाकर तीर्थ, हत्याहरण तीर्थ, धौतपाप तीर्थ, नर्मदेश्वर, तुंबुरु नारायण, दश कन्या तीर्थ, सूर्यकुंड, हरिहर क्षेत्र, विष्णु आवर्त, रुद्रावर्त और भी अनेक तीर्थ क्षेत्र।

 

प्रवास व्यवस्था

काशी (बनारस) से नैमिषारण्य की यात्रा ए.सी. सुपर लग्जरी अवानिया वाहन के माध्यम से सम्पन्न होगी।
नैमिषारण्य की तीन दिवसीय 84 कोस परिक्रमा ए.सी. फोर व्हीलर अथवा ए.सी. ट्रैवलर के माध्यम से सम्पन्न होगी।
काशी, अयोध्या, नैमिषारण्य आदि के स्थानीय दर्शन रिक्शा आदि के द्वारा सम्पन्न होंगे।
जहाँ तक अनुमति होगी, वाहन वहीं तक जाएंगे।
प्रतिदिन 1.5 से 2 कि.मी. पैदल चलने की मानसिक एवं शारीरिक तैयारी के साथ यात्रा में पधारें।
काशी विश्वनाथ दर्शन के पश्चात होटल तक आने की व्यवस्था यात्री स्वयं करेंगे।
अयोध्या, काशी आदि मंदिरों में व्हील चेयर, सुगम दर्शन शुल्क आदि यात्री वहन करेंगे।
निवास व्यवस्था
यात्रा एवं कथाकाल में सर्वत्र 2 भक्तों के लिए 1 ए.सी. डबल बेड अटैच सुविधा युक्त कमरे की व्यवस्था रहेगी।
यात्रा प्रारम्भ होने से पहले वाराणसी में निवास एवं नैमिषारण्य में कथा समापन के पश्चात नैमिषारण्य अथवा लखनऊ में निवास के समस्त व्यय यात्री स्वयं वहन करेंगे।
प्रथम तल (फर्स्ट फ्लोर) तक चढ़ने-उतरने की मानसिकता के साथ पधारें।

 


​पूजन एवं कथा व्यवस्था
​कथा काल में प्रतिदिन बालकृष्ण भगवान को षोडशोपचार पूजन होगा, जो प्रत्येक भक्त व्यक्तिगत रुप से करेगा।
​कथा काल में पूजन में प्रयुक्त होने वाली समस्त पूजन सामग्री आयोजकों द्वारा प्रदान की जावेगी।
​प्रत्येक भक्त व्यक्तिगत रुप से अथवा जोड़े से बालकृष्ण भगवान का पूजन करेगा। इसलिये कथा यात्रा में पधारते समय स्वयं के पूजन गृह में स्थित बालकृष्ण भगवान की प्रतिमा लेकर पधारें। जोड़े में एक प्रतिमा स्वीकार्य है।
​कथा एवं पूजन काल में पुरुषों और महिलाओं को भारतीय पोषाख धारण करना अनिवार्य है।
​कथा श्रवण, षोडशोपचार पूजन, हवन आदि विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए 2101/- रु. दक्षिणा (प्रतिव्यक्ति) यात्रा शुल्क के अतिरिक्त देना होगी।

 

 

भोजन व्यवस्था

यात्रा में दोनों समय शुद्ध-सात्विक-स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी, जिसमें समयानुसार मिष्ठान का समावेश रहेगा।
कथा सत्र के दौरान (7 दिवस) भोजन में प्याज एवं लहसुन का प्रयोग नहीं होगा।
प्रातःकाल नाश्ता (बालभोग) एवं दो समय चाय/कॉफी की व्यवस्था (वेंडिंग मशीन द्वारा) रहेगी।
एकादशी एवं संकष्टी चतुर्थी के उपवासिक भोजन की व्यवस्था रहेगी। व्यक्तिगत एवं सामूहिक उपवास की व्यवस्था नहीं रहेगी। उपवास के दिन प्रातः नाश्ते की व्यवस्था नहीं रहेगी।
समय पर भोजन प्रसादी की व्यवस्था के लिए अलग भोजन वाहन (पेन्ट्री कार) की व्यवस्था रहेगी।
सम्पूर्ण यात्रा काल में प्रतिदिन 2 लीटर बोतलबंद आर.ओ. शुद्धीकृत पेयजल प्रदान किया जाएगा।
कथा काल में आर.ओ. पेयजल की व्यवस्था रहेगी।

 

 

सामान एवं अन्य निर्देश

कम से कम सामान के साथ यात्रा करके अधिक से अधिक आनंद प्राप्त करें।

प्रति व्यक्ति 1 बड़ा सूटकेस अथवा बैग (वजन 18 कि.ग्रा. तक) ही मान्य होगा, जिसका परिवहन सेवकों के माध्यम होगा।

अतिरिक्त सामान का परिवहन यात्री स्वयं करेंगे।

मूल्यवान आभूषण, वस्तुएँ स्वयं के उत्तरदायित्व पर साथ में लावें।

यात्री अपने शारीरिक स्वास्थ्य एवं पथ्य परहेज का स्वयं ध्यान रखेंगे। नियमित औषधियाँ पर्याप्त मात्रा में साथ में रखें।

प्राथमिक उपचार की सुविधा रहेगी। स्वास्थ्य अधिक खराब होने की स्थिति में परिजनों को सूचना देकर उचित निर्णय लिया जायेगा।

यात्रा प्रारंभ होते समय यात्री अपने साथ शासन प्रमाणित परिचय पत्र (आधार कार्ड आदि) साथ में रखें। एक पासपोर्ट आकार का फोटो भी साथ में रखें।

घाटों पर स्नान करते समय सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

तत्कालीन अपरिहार्य परिस्थिति के कारण कार्यक्रम में परिवर्तन का अधिकार आयोजकों के पास सुरक्षित है।

कथा यात्रा प्रारंभ होने से 15 दिवस पहले सहभागियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जायेगा, जिसमें और अधिक विस्तृत विवरण दिया जायेगा।

सभी विवादों का न्यायक्षेत्र बड़वाह रहेगा।

 

 

 

आरक्षण प्रक्रिया

यात्रा राशि में भोजन, निवास, पूजन सामग्री व स्थानीय भ्रमण (काशी विश्वनाथ मंदिर से लौटने की व्यवस्था को छोड़कर) आदि समस्त शुल्क सम्मिलित हैं।

आरक्षण के समय रु. 15,000/- प्रति व्यक्ति जमा करके अपना स्थान सुनिश्चित करें।

आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने से 60 दिन पहले प्रति व्यक्ति 15,000/- रुपये जमा करें। शेष राशि यात्रा प्रारंभ होते समय जमा करें।

वाराणसी तक आने की एवं लखनऊ से वापसी का समस्त व्यय यात्री स्वयं वहन करेंगे।

आरक्षण राशि जमा करने पर यात्री को सभी सुविधा और नियम ज्ञात एवं मान्य हैं, ऐसा माना जाएगा।

कृपया किसी प्रकार की छूट अथवा डिस्काउंट की चर्चा न करें।

 

 

 

निरस्तीकरण (कैंसलेशन) प्रक्रिया

आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने के 90 अथवा अधिक दिन पहले आरक्षण निरस्त करने पर प्रति व्यक्ति रु. 3000/- काटकर शेष राशि वापस लौटा दी जायेगी।

आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने के 60 से 90 दिवस के मध्य यात्रा निरस्त करने पर रु. 10,000/- काटकर शेष राशि वापस लौटाई जायेगी।

आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने के 30 से 59 दिवस के मध्य यात्रा निरस्त करने पर कुल यात्रा राशि का 15,000/- काटकर शेष राशि वापस लौटाई जायेगी।

यात्रा प्रारंभ होने में 30 दिन शेष रहने पर कोई राशि नहीं लौटाई जा सकेगी।

बताई गई समय सीमा में यात्रा राशि जमा न करने पर आरक्षण स्वतः निरस्त माना जायेगा एवं नियमानुसार राशि काटकर शेष राशि लौटा दी जायेगी।

यात्रा प्रारंभ होने के पश्चात किसी कारणवश बीच में यात्रा छोड़ने पर कोई राशि वापस नहीं लौटाई जायेगी।

किन्हीं अपरिहार्य कारणों से आरक्षण निरस्त करने पर अन्य यात्री को अपने स्थान पर भेज सकते हैं।

आरक्षण निरस्त होने पर यात्रा राशि अन्य यात्राओं में समायोजित नहीं होगी।

लॉकडाउन, कर्फ्यू, युद्ध, प्राकृतिक आपदा अथवा शासकीय प्रतिबंध की स्थिति में यात्रा निरस्त होने पर जमा राशि वापस (रिफंड) न करते हुए भविष्य की यात्रा में समायोजित होगी।

वर्तमान युद्धजन्य परिस्थिति को देखते हुए डीजल अथवा ईंधन के भाव में अप्रत्याशित वृद्धि होने पर यात्रा राशि में आंशिक वृद्धि संभव है।

यह कैंसलेशन प्रक्रिया ध्यान से पढ़ें, इसका अक्षरशः पालन किया जायेगा। बाद में किसी प्रकार का विवाद मान्य नहीं होगा।

 

 

 


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